प्रशिक्षण शिविर

अनुसन्धान एवं वैज्ञानिक प्रयोगों से यह सिद्ध हो चुका है कि संस्कृत भाषा का प्रयोग न केवल मुख की समस्त तन्त्रिकाओं के विकास के लिए उपयोगी है अपितु इसके उच्चारण से स्वास्थ्य समस्याओं का भी समाधान प्राप्त होता है. जो लोग संस्कृत भाषा का निरन्तर प्रयोग करते हैं , उनके जीवन में हृदयाघात जैसी स्वास्थ्य समस्याएं कभी उत्पन्न नहीं होती हैं. वैसे भी संस्कृत में शब्दों के उच्चारण की विशिष्ट पद्धति होती है, जिसके भलीभांति सीखे बिना संस्कृत के शब्दों का उच्चारण करने से अर्थ के स्थान पर अनर्थ की सम्भावना रहती है. स्वामी रामतीर्थ संस्कृत अकादमी संस्कृतप्रेमियों, छात्रों और शिक्षकों को विभिन्न स्तरों पर संस्कृत का प्रशिक्षण देने के लिए प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन करती है. इन शिविरों में नवागंतुकों को जहाँ संस्कृत की वर्णमाला आदि का प्राम्भिक ज्ञान, व्याकरण, शिष्टाचार सम्बन्धी वाक्यों का अभ्यास, घर-कार्यालय आदि में संस्कृत में वार्तालाप एवं गायन आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है, वहीं माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को माध्यमिक स्तर पर संस्कृत के प्रभावी शिक्षण के नये-नये तरीके सिखाये जाते हैं. जो संस्कृत प्रेमी उपासना आदि कार्यों में संस्कृत के मन्त्रों का प्रयोग करते हैं अथवा स्तोत्र, श्रीमद्भगवद्गीता तथा दुर्गासप्तशती आदि का पाठ करते हैं, उनके लिए अलग से आयोजित होने वाले शिविरों में संस्कृत की उच्चारण विधियों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है. जो संस्कृतप्रेमी, छात्र, शिक्षक एवं संस्थाएं इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़ना चाहते हैं, उनका अकादमी में स्वागत है. अद्यतन शिविर के स्थान तिथि आदि की सूचना वेबसाइट पर उपलब्ध है.



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