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स्वामी रामतीर्थ संस्कृत अकादमी

बारे में

आज जबकि विज्ञान और तकनीक अपने चरम पर है, विश्व की प्राचीनतम और सबसे समृद्ध भाषा ‘संस्कृत’ के प्रति दुनियाँ की रुचि बढ़ती जा रही है. वर्तमान समय में वैज्ञानिक दृष्टि और ज्ञान की समस्त शाखाओं का उत्स ‘संस्कृत’ के अध्ययन के प्रति जितना आकर्षण यूरोप और अमेरिका जैसे महाद्वीपों में देखने को मिलता है, उससे संस्कृत भाषा और उसके साहित्य में निहित ज्ञान –विज्ञान के महत्व का सहज अनुमान लगाया जा सकता है. विडम्बना यह है की जिस आर्यावर्त की भूमि पर संस्कृत भाषा का उद्भव और विकास हुआ, वहाँ कालान्तर में इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए जितना प्रयास होना चाहिए था, उतना प्रायः देखने को नहीं मिलता है. वर्तमान समय में तो स्थिति और वीभत्स होती जा रही है, जब संस्कृत भाषा की बात करना पिछड़ेपन और साम्प्रदायिकता का सूचक माना जाने लगा है. यद्यपि वैयक्तिक, सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन के प्रत्येक स्तर पर इसके भयावह परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं, लेकिन तथाकथित ‘आधुनिकता’ की चमक-दमक के आगे आत्मावलोकन का समय और दृष्टि शेष कहाँ है?

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लेखक के रूप में

अकादमी संस्कृत भाषा और साहित्य को हिन्दी भाषा के माध्यम से आम लोगों तक पहुँचाने का कार्य कर रही है, जो विद्वान् इस कार्य में...

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अकादमी में प्रारम्भिक स्तर से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निर्देशन का कार्य कर रही है, जो विद्वान् शिक्षक के रूप में कार्य करने के ....

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अकादमी संस्कृत भाषा और साहित्य का नाट्य,गायन आदि ललित कलाओं के माध्यम से प्रचार-प्रसार करने का कार्य कर रही है...

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व्यापक जनसम्पर्क और विभिन्न प्रचार माध्यमों से संस्कृत का प्रचार-प्रसार करना अकादमी की प्राथमिकता है,जो विद्वान् इस कार्य में ...

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