शिक्षक के रूप में

अकादमी परिसर में सञ्चालित कक्षाओं एवं ई-पोर्टल के माध्यम से व्यापक स्तर पर प्रारम्भिक संस्कृत के शिक्षण से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं तक की तैयारी के लिए मार्गदर्शन उपलब्ध कराती है. समय-समय पर प्रशिक्षण लेने के इच्छुकजनों की सुविधा और संख्या के अनुसार विभिन्न केन्द्रों पर वैदिक मन्त्रों के उच्चारण, शास्त्रीय ग्रन्थों के पढ़ने एवं संस्कृत सम्भाषण के प्रशिक्षण का कार्यक्रम भी सञ्चालित होता है. आधुनिक शिक्षा पद्धति से सञ्चालित विद्यालयों/महाविद्यालयों में माध्यमिक, स्नातक एवं परास्नातक स्तर पर संस्कृत का अध्ययन करने वाले छात्रों की सहायता के लिए भी अकादमी शैक्षिक निर्देशन उपलब्ध कराती है. शीघ्र ही शिक्षण-प्रशिक्षण का यह कार्य दिल्ली के अतिरिक्त देश के अन्य प्रदेशों में सञ्चालित हो, अकादमी इसके लिए सतत् प्रयत्नशील है.
उक्त सभी शैक्षिक कार्यों के सञ्चालन के लिए योग्य एवं संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित शिक्षकों की आवश्यकता होना स्वाभाविक है. जो विद्वान् शिक्षक अकादमी के शैक्षिक कार्यक्रम से जुड़कर मुख्यालय परिसर में आकर संस्कृत की सेवा करना चाहते हैं, उनका परिसर में स्वागत है तथा जो दूरी आदि किन्ही कारणों से मुख्यालय परिसर/शिक्षणकेन्द्र तक आने में सक्षम नहीं हैं, लेकिन अध्यापन कार्य करने के इच्छुक हैं, वे नवीनतम तकनीक (आडियो/वीडियो) का प्रयोग कर घर बैठे अपनी सेवाएँ दे सकते हैं. यदि किसी अध्यापक के आवास के निकट स्थान पर छात्रों की उपलब्धता सुनिश्चित हो, तो अकादमी वहां पर भी शिक्षण-प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित करने में सहयोग करने के लिए तत्पर है, जिससे अध्यापक की उपलब्धता का लाभ आसपास के छात्रों को सहज रूप से हो सके और छात्रों को संस्कृत के अध्ययन में किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े.
ध्यातव्य है कि संस्कृत अध्यापन एक वृत्ति मात्र नहीं अपितु संस्कार प्रक्रिया है, जो व्यक्ति, समाज, राष्ट्र और सम्पूर्ण विश्व को संस्कारित और परिष्कृत करने की सामर्थ्य रखती है. जो विद्वान् अध्यापक संस्कृत अध्यापन में रुचि रखते हैं तथा अकादमी के माध्यम से देश के किसी प्रान्त/स्थानविशेष में रहकर संस्कृत का अध्यापन कार्य करना चाहते हैं, वे इस कार्य में अपना योगदान देने के लिए आगे आयें, अकादमी प्रत्येक स्तर पर उनका यथासम्भव सहयोग करने के लिए तत्पर है.

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लेखक के रूप में

अकादमी संस्कृत भाषा और साहित्य को हिन्दी भाषा के माध्यम से आम लोगों तक पहुँचाने का कार्य कर रही है, जो विद्वान् इस कार्य

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अकादमी संस्कृत भाषा और साहित्य का नाट्य,गायन आदि ललित कलाओं के माध्यम से प्रचार-प्रसार करने का कार्य कर रही है...

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प्रचारक के रूप में

व्यापक जनसम्पर्क और विभिन्न प्रचार माध्यमों से संस्कृत का प्रचार-प्रसार करना अकादमी की प्राथमिकता है,जो विद्वान् इस

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