परिचर्चा

व्यापक और समृद्ध संस्कृत साहित्य में ऐसे अनेक विषय हैं, जो संस्कृत अध्येताओं में जिज्ञासा उत्पन्न करते रहते हैं. इन विषयों पर चर्चा के साथ प्रश्नों के तत्काल समाधान के लिए अकादमी परिचर्चा कार्यक्रमों का आयोजन करती है. इस परिचर्चा कार्यक्रम के लिए विषयों/ बिन्दुओं का चयन अध्येताओं की जिज्ञासा के अनुसार किया जाता है. जिस प्रकार का विषय होता है, उसी के अनुसार एक या दो विशेषज्ञ विद्वानों को नियत तिथि और स्थान पर आमन्त्रित कर विषय पर चर्चा की जाती है. इस परिचर्चा कार्यक्रम का लाभ यह है कि जिज्ञासु और विशेषज्ञ दोनों को पहले से पता रहता है कि उन्हें क्या सुनना और क्या सुनना है.

परिचर्चा का विषय कोई भी हो सकता है, बशर्ते वह संस्कृत और संस्कृति से जुड़ा हुआ हो. कुछ विशेष अवसरों जैसे किसी महापुरुष की जयन्ती, पुण्यतिथि आदि पर उसी महापुरुष के व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा की जाती है, ताकि आम लोगों को उसके कार्यों और योगदान की जानकारी मिल सके. अकादमी का परिचर्चा कार्यक्रम संस्कृतप्रेमियों, विद्यार्थियों तथा अन्य जिज्ञासुओं के लिए एक ऐसा अनूठा पटल है, जो चयन की स्वतन्त्रता देता है, वह चयन चाहे विषय का हो या विशेषज्ञ विद्वान् का. संस्थानों को यह सुविधा दी जाती है कि वे यदि अपने यहाँ परिचर्चा का आयोजन कराना चाहते हैं, तो वे अपनी सुविधा के अनुसार समय और विषय आदि का चयन कर सकते हैं. विशेषज्ञ विद्वान् आदि की व्यवस्था अकादमी की ओर से की जाती है.



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